श्री शिव मंदिर, किल्हौड़ा
होली पर्व एवं चंद्र ग्रहण 2026
आधिकारिक सूचना एवं विस्तृत जानकारी
1. चंद्र ग्रहण क्या होता है? (वैज्ञानिक कारण)
जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण होता है। यह एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है।
वैज्ञानिक दृष्टि से ग्रहण स्वयं में हानिकारक नहीं होता, लेकिन पहले के समय में जब कृत्रिम प्रकाश और सुरक्षा साधन नहीं थे, तब लोग इसे असामान्य और प्रभावशाली घटना मानते थे।
2. धार्मिक दृष्टि से ग्रहण का महत्व
हिंदू धर्म में ग्रहण को आध्यात्मिक दृष्टि से संवेदनशील समय माना गया है। इस दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा अधिक सक्रिय मानी जाती है।
इसलिए इस समय पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श और शुभ कार्यों को विराम दिया जाता है।
3. मूर्तियों को स्पर्श क्यों नहीं किया जाता?
धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण काल में वातावरण शुद्ध नहीं माना जाता। मूर्तियाँ दिव्य ऊर्जा का प्रतीक होती हैं, इसलिए ग्रहण के समय उन्हें ढक दिया जाता है और स्पर्श नहीं किया जाता।
इसका उद्देश्य मूर्ति की पवित्रता और सम्मान बनाए रखना है।
4. मंदिर के कपाट क्यों बंद रखे जाते हैं?
चंद्र ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल प्रारंभ माना जाता है। सूतक के दौरान नियमित पूजा-पाठ रोक दिया जाता है।
ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर में गंगाजल छिड़काव, सफाई और शुद्धिकरण प्रक्रिया की जाती है।
इसी कारण मंदिर के कपाट ग्रहण के दिन प्रातः 6:20 बजे से शाम 7:00 बजे तक बंद रखे जाएंगे।
5. क्या ग्रहण से कोई वैज्ञानिक हानि होती है?
वैज्ञानिक रूप से चंद्र ग्रहण देखने से कोई शारीरिक हानि नहीं होती। यह पूर्णतः प्राकृतिक घटना है।
लेकिन धार्मिक परंपराएँ हजारों वर्षों से चली आ रही हैं, इसलिए समाज की आस्था और परंपरा का सम्मान करते हुए इन नियमों का पालन किया जाता है।
6. महत्वपूर्ण तिथियाँ
सत्यनारायण व्रत कथा: 2 मार्च 2026
होलिका दहन: 3 मार्च 2026 (सायंकाल)
चंद्र ग्रहण: 3 मार्च 2026 (3:20 PM – 6:47 PM)
रंग वाली होली: 4 मार्च 2026
7. श्रद्धालुओं हेतु सुझाव
- ग्रहण काल में मंदिर परिसर में प्रवेश न करें।
- ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें।
- धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करें।


